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Tuesday, January 1, 2019

2023 प्रदोष व्रत पूजा तारीख व समय, 2023 प्रदोष व्रत त्यौहार समय सूची व कैलेंडर

2023 प्रदोष व्रत पूजा तारीख व समय, 2023 प्रदोष व्रत त्यौहार समय सूची व कैलेंडर
2023 प्रदोष व्रत पूजा तारीख व समय, 2023 प्रदोष व्रत त्यौहार समय सूची व कैलेंडर

प्रदोष व्रत में भगवान शिव की उपासना की जाती है | यह व्रत हिंदू धर्म के सबसे शुभ व महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है | हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार प्रदोष व्रत चंद्र मास के 13 वें दिन (त्रयोदशी) पर रखा जाता है | हर महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। अलग-अलग दिन पड़ने वाले प्रदोष की महिमा अलग-अलग होती है। सोमवार का प्रदोष, मंगलवार को आने वाला प्रदोष और अन्य वार को आने वाला प्रदोष सभी का महत्व और लाभ अलग अलग है।

प्रदोष व्रत पूजा 2023 के तारीख व कैलेंडर:

त्यौहार के नाम दिन त्यौहार के तारीख
प्रदोष व्रत बुधवार 4 जनवरी 2023
प्रदोष व्रत गुरूवार 19 जनवरी 2023
प्रदोष व्रत गुरूवार 2 फरवरी 2023
प्रदोष व्रत शनिवार 18 फरवरी 2023
प्रदोष व्रत शनिवार 4 मार्च 2023
प्रदोष व्रत रविवार 19 मार्च 2023
प्रदोष व्रत सोमवार 3 अप्रैल 2023
प्रदोष व्रत सोमवार 17 अप्रैल 2023
प्रदोष व्रत बुधवार 3 मई 2023
प्रदोष व्रत बुधवार 17 मई 2023
प्रदोष व्रत गुरूवार 1 जून 2023
प्रदोष व्रत गुरूवार 15 जून 2023
प्रदोष व्रत शनिवार 1 जुलाई 2023
प्रदोष व्रत शनिवार 15 जुलाई 2023
प्रदोष व्रत रविवार 30 जुलाई 2023
प्रदोष व्रत रविवार 13 अगस्त 2023
प्रदोष व्रत सोमवार 28 अगस्त 2023
प्रदोष व्रत मंगलवार 12 सितंबर 2023
प्रदोष व्रत बुधवार 27 सितंबर 2023
प्रदोष व्रत गुरूवार 12 अक्टूबर 2023
प्रदोष व्रत गुरूवार 26 अक्टूबर 2023
प्रदोष व्रत शुक्रवार 10 नवंबर 2023
प्रदोष व्रत शनिवार 25 नवंबर 2023
प्रदोष व्रत रविवार 10 दिसंबर 2023
प्रदोष व्रत रविवार 24 दिसंबर 2023

प्रमोशम के दिन सूर्योदय और सूर्यास्त से पहले के समय को शुभ माना जाता है। इस समय के दौरान ही सभी सारी पूजा पाठ किये जाते है। इस व्रत को वार के अनुसार करने से ज्‍यादा लाभ मिलता है। जिस वार को यह व्रत पड़ता है उसी अनुसार कथा पढ़ने से फल भी प्राप्‍त होते हैं। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार शिव जी की पूजा का सही समय शाम का है, जब मंदिरों में प्रदोषम मंत्र का जाप किया जाता है। यदि प्रदोष व्रत शनिवार को पड़ रहा है तो इस व्रत को करने से पुत्र की प्राप्‍ती होगी।  यदि व्‍यक्‍ति को सभी प्रकार की पूजा पाठ और व्रत करने के बाद भी सुख शांति और खुशी नहीं मिल पा रही है तो उस व्‍यक्‍ति को हर माह पड़ने वाले प्रदोष व्रत पर जप, दान, व्रत आदि करने से पूरा फल मिलता है।

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